Alankar Kise Kahate Hain – अलंकार किसे कहते हैं?

Alankar Kise Kahate Hain :- भारत में हिन्दी शब्द को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिया गया है और हमारे विद्यालयों में भी हिन्दी भाषा पढ़ाई जाती है और हिन्दी भाषा पढ़ने व बोलने के लिए व्याकरण का प्रयोग किया जाता है और व्याकरण में अलंकार जैसे शब्दों को प्रयोग करके ही हिन्दी शब्द पढ़ा व बोला जाता है।

हमारे बहुत से स्टूडेंट्स है जो अभी कक्षा 5, कक्षा 10 व कक्षा 12 की पढ़ाई कर रहे हैं जिन्हें अलंकार के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है जिससे वे बच्चे हिन्दी शब्द का प्रयोग सही से लिखने पढ़नें में नहीं कर पाते हैं। और स्टूडेंट्स के लिए यह बहुत ही कठिन टॉपिक बन चुका है।

इसीलिए आज के इस पोस्ट में हम अलंकार के बारे में विस्तार से जानने वाले है और आपकी जानकारी के लिए बता दूँ की आप किसी भी कक्षा में पढ़ते हों और आपने अलंकार किसे कहते हैं Class 9 अथवा अलंकार किसे कहते हैं Class 8 या अलंकार किसे कहते हैं Class 10 के लिए गूगल पर सर्च किया है तो यह सभी क्लास के लिए उपयोगी है।

आप किसी भी कक्षा में हों अगर आपके परीक्षा में अलंकार क्या होता है (Alankar Kya Hota Hai) यह प्रश्न आता है तो आप इस पोस्ट में बताई गई जानकारी को अपने परीक्षा में लिख सकते हैं।

आज के पोस्ट में अलंकार क्या है अलंकार की परिभाषा?, अलंकार के प्रकार, अलंकार किसे कहते हैं और उसके कितने भेद होते हैं? , इन सभी के बारे में हम पढ़ने वाले हैं आप इस पोस्ट को पूरा पढ़ना और मुझे यकीन है की यह पोस्ट पूरा पढ़ने के बाद आपको इससे संबधित जानकारी के लिए कोई दूसरा आर्टिकल पढ़ने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। तो चलिए शुरू करते हैं।

अलंकार किसे कहते हैं – Alankar Kise Kahate Hain

किसी भी काव्य शब्द की शोभा बढ़ाने वाले अवयव को अलंकार कहते हैं और अलंकार का अर्थ आभूषण होता है। अगर हम इस चीज को और भी सरल भाषा में समझें तो जिस प्रकार आभूषण का प्रयोग स्त्री की शोभा बढ़ाने के लिए किया जाता है ठीक उसी प्रकार अलंकार का प्रयोग काव्य, साहित्य, शब्द की शोभा बढ़ाने के लिए किया जाता है।

मुझे यकीन है की अलंकार का अर्थ क्या होता है इसके बारे में आप समझ गए होंगे।

अलंकार के कितने भेद होते हैं – Alankar Ke Kitne Bhed Hai

किसी भी काव्य, व्यंग, साहित्य की शोभा बढ़ाने वाले अलंकार के मुख्य रूप से तीन भेद होते हैं जो की निम्नलिखित हैं।

  1. शब्दालंकार
  2. अर्थालंकार
  3. उभयालंकार

शब्दालंकार किसे कहते हैं – Shabd Alankar Kise Kahate Hain

शब्दालंकार का प्रयोग विशेष रूप से जहां पर किसी भी काव्य में किसी शब्द के प्रयोग से उस काव्य की सुंदरता में वृद्धि होती है तो वहाँ पर उसे शब्दालंकार कहते हैं।

शब्दालंकार कितने प्रकार के होते हैं – Shabd Alankar Kitne Prakar Ke Hote Hain

शब्दालंकार को मुख्यतः छह भागों में बांटा गया है जो की निम्नलिखित हैं –

  • अनुप्रास अलंकार
  • यमक अलंकार
  • श्लेष अलंकार
  • पुनरुक्ति अलंकार
  • विप्सा अलंकार
  • वक्रोक्ति अलंकार

अनुप्रास अलंकार किसे कहते हैं – Anupras Alankar Kise Kahate Hain

अनुप्रास अलंकार में जब किसी भी काव्य छंद को आकर्षक बनाने के लिए एक ही वर्ण का इस्तेमाल बार बार किया जाए जो वहाँ पर अनुप्रास अलंकार होता है। जैसे की इसका उदाहरण नीचे आप समझ सकते हैं –

अनुप्रास अलंकार के उदाहरण – Anupras Alankar Ke Udaharan

उदाहरण 1

कामपंथी कम्युनिष्ट कुकर्मी कांग्रेसी केजरीवाली कोढ़ कुटिल कमीना कामरेड कन्हैया।

इसमें वर्ण की आवर्त्ति बार बार हुई है मतलब हर एक शब्द में वर्ण देखने को मिल रहा है इसीलिए यहाँ पर अनुप्रास अलंकार होगा।

उदाहरण 2

मुदित महीपति मंदिर आये, सेवक सकहुव सुमंत बुलाए।

इसमें भी तथा वर्ण बार बार आने की आवृत्ती हो रही है इसीलिए यहाँ पर भी अनुप्रास अलंकार होगा।

यमक अलंकार किसे कहते हैं – Yamak Alankar Kise Kahate Hain

किसी भी भी वाक्य में किसी एक शब्द की बार बार अवर्त्ति होने पर उसे यमक अलंकार कहते हैं। मतलब किसी भी वाक्य में एक ही शब्द बार बार आता है जिससे की वाक्य को और भी सुंदर बना सकें तो वहाँ पर यमक अलंकार की उत्पत्ति होती है इसका उदाहरण आप नीचे देख सकते है। Yamak Alankar Ke Udaharan जैसे की –

यमक अलंकार के उदाहरण 1

सारंग नयन बयन पुनि सारंग सारंग तसु सन्धाने।

सारंग उपर उगल दुई सारंग केली करिए मधुपाने।।

इस पूरे वाक्य में “सारंग” शब्द की आवृत्ती पाँच बार हुई है इसीलिए यहाँ पर यमक अलंकार होगा।

उदाहरण 2

त्यों रसखानि वही रसखानि जु है रसखानि सो है रसखानि।

इस वाक्य में भी “रसखानि” शब्द की आवृत्ती चार बार हुए है इसीलिए यहाँ पर भी यमक अलंकार होगा।

उदाहरण 3

उधौ जोग जोग हम नाही।

इस पंक्ति में भी जोग शब्द की आवृत्ती दो बार हुई है इसलिए यहाँ पर भी यमक अलंकार की प्राप्ति होगी। यकीनन आप समझ गए होंगे की किसी भी पूरे वाक्य में एक ही शब्द ही आवृत्ती बार हो तब वहाँ पर यमक अलंकार की प्राप्ति होगी।

श्लेष अलंकार किसे कहते हैं – Slesh Alankar Kise Kahate Hain

Shlesh Alankar Kise Kahate Hain – श्लेष अलंकार का अर्थ किसी भी पूरे वाक्य में एक ही शब्द की आवृत्ती बार बार हो परंतु उनके अर्थ अलग अलग हों तो उसे श्लेष अलंकार कहते हैं। Slesh Alankar Ke Udaharan आप नीचे देख सकते हैं –

श्लेष अलंकार के उदाहरण – Slesh Alankar Ke Udaharan

उदाहरण 1

रहिमन पानी रखिए, बिन पानी सब सून।

पानी गए णा ऊबरे, मोती मानुष चून।।

इस दिए हुए उदाहरण में “पानी” शब्द की आवृत्ती कई बार हुई है परंतु इसके मतलब अलग अलग है और इस शब्द का उपयोग वाक्य को सुंदर बनाने के लिए बार बार इस्तेमाल किया गया है। और इसीलिए यहाँ पर यह श्लेष अलंकार होगा।

  • इस पंक्ति में पहले “पानी” का मतलब मनुष्य में हर समय विनम्रता होनी चाहिए।
  • दूसरे “पानी” का अर्थ चमक है, मतलब बिना चमक के मोती का भी कोई मूल्य नहीं है।
  • तथा तीसरे “पानी” का अर्थ जल से है। मतलब जैसे की लोहा को काटने के लिए का ही प्रयोग किया जाता है है ठीक उसी प्रकार हर इंसान को हमेशा विनम्रता का व्यवहार रखना चाहिए क्योंकि बिना विनम्रता की मनुष्य का कोई भी मूल्य नहीं है।

पुनरुक्ति अलंकार किसे कहते हैं – Punrukti Alankar Kise Kahate Hain

पुनरुक्ति पुनः + उक्ति शब्द मतलब यह दो शब्दों से मिलकर बना होता है। और जब किसी भी वाक्य में यह दो शब्द बार बार आये तो वहाँ पर पुनरुक्ति अलंकार की उत्पत्ति होती है। Punrukti Alankar Ke Udaharan आप नीचे देख सकते हैं –

पुनरुक्ति अलंकार के उदाहरण

उदाहरण 1

बार बार आती है मुझको।

मधुर याद बचपन तेरी।।

उदाहरण 2

पुनि-पुनि मोहि दिखाव कुठारू।

उदाहरण 3

अब दूर जोग संदेसनि सुनि-सूनी।

विरहिनि विरह दही।।

विप्सा अलंकार किसे कहते हैं – Vipsa Alankar Kise Kahate Hain

सम्मन, हर्ष, उत्साह, शोक जैसे भावों के प्रकट होने पर विप्सा अलंकार की आवृत्ती होती है। इसे अगर हम और भी सरल भाषा मेंसमझें तो जब कोई कोई व्यक्ति दुख, खुशी, आदर जैसे भावों को व्यक्त करता है तो वहाँ पर विप्सा अलंकार कहा जाता है। विप्सा अलंकार के उदाहरण (Vipsa Alankar Ke Udaharan) नीचे आप देख सकते हैं –

उदाहरण 1

मोहि-मोहि मोहन को मन भयो राधामय।

राधा मन मोहि-मोहि मोहन मयी-मयी।

उदाहरण 2

विहग-विहग

फिर चहक उठे ये पुंज-पुंज

कल-कूजित कर उर का निकुंज

चिर सुभग-सुभग

उदाहरण 3

“हा! हा!! इन्हें रोकन को टोक न लगावो तुम।

मधुर दीपक मेरे जल।।

वक्रोक्ति अलंकार किसे कहते हैं – Vakrokti Alankar Kise Kahate Hain

वक्रोक्ति अलंकार का मतलब किसी व्यक्ति द्वारा बोला गया एक शब्द को ही किसी दूसरे शब्दों में कोई दूसरा व्यक्ति बोले परंतु दोनों के मतलब एक ही हों तब वहाँ पर वक्रोक्ति अलंकार की आवृत्ती होती है। Vakrokti Alankar Ke Udaharan नीचे दिए गए हैं जिससे आप समझ सकते हैं –

वक्रोक्ति अलंकार के उदाहरण 1

रुको, मत जाने दो – – – रुको मत, जाने दो।

उदाहरण 2

जानु जाओ मत बैठो।

उदाहरण 3

कौन द्वार पर

राधे ! मैं हरि

क्या वानर का काम यहाँ।

उदाहरण 4

एक कव्हौ वर देत भव भाव चाहिए चित्त।

सुनि कह कोउ भोले भवहिं भाव चाहिए चित्त।।

अर्थालंकार किसे कहते हैं – Arthalankar Kise Kahate Hain

जब किसी भी वाक्य में किसी शब्द का इस्तेमाल करके उस वाक्य में चमत्कार पैदा हो तो वहाँ पर अर्थालंकार होगा और इसी को अर्थालंकार कहते हैं। मतलब अगर कोई व्यक्ति कोई ऐसा वाक्य या शब्द बोलता है जिसमें चमत्कार उत्पन्न होता है तो वहाँ पर अर्थालंकार की आवृत्ती होती है।

अर्थालंकार कितने प्रकार के होते हैं – Arthalankar Kitne Prakar Ke Hote Hain

अर्थालंकार मुख्य रूप से (उपमा, रूपक, उत्प्रेच्छा विभावना) चार प्रकार के होते हैं लेकिन वास्तव में इसके 23 भाग होते हैं जिसे आप नीचे पढ़ सकते हैं। (अर्थालंकार के उदाहरण) –

  1. उपमा अलंकार
  2. रूपक अलंकार
  3. उत्प्रेछा अलंकार
  4. द्रष्टान्त अलंकार
  5. संदेह अलंकार
  6. अतिश्योक्ति अलंकार
  7. उपमेय अलंकार
  8. प्रतीप अलंकार
  9. अनन्वय अलंकार
  10. भ्रांतिमान अलंकार
  11. दीपक अलंकार
  12. अपहृति अलंकार
  13. व्यतिरेक अलंकार
  14. विभावना अलंकार
  15. विशेषोक्ति अलंकार
  16. अर्थान्तरन्यास अलंकार
  17. उल्लेख अलंकार
  18. विरोधाभाष अलंकार
  19. असंगति अलंकार
  20. मानवीकरण अलंकार
  21. अन्योक्ति अलंकार
  22. काव्यलिंग अलंकार
  23. स्वभावोती अलंकार

उपमा अलंकार किसे कहते हैं – Upma Alankar Kise Kahate Hain

Upma Alankar Ki Paribhasha -जब किसी व्यक्ति या वस्तु की तुलना किसी दूसरे व्यक्ति या वस्तु से की जाए तब वहाँ पर उपमा अलंकार की आवृत्ती होती है और इसी को उपमा अलंकार कहते हैं।

मतलब जैसे की कोई व्यक्ति है और उस व्यक्ति की तुलना हम किसी दूसरे व्यक्ति से करते हैं तो उसे उपमा अलंकार कहते हैं ठीक उसी प्रकार जैसे की कोई वस्तु है और उसकी तुलना हम किसी दूसरे वस्तु से करते हैं तो उसे उपमा अलंकार कहते हैं।

उपमा अलंकार के उदाहरण – Upma Alankar Ke Udaharan –

उदाहरण 1

“कर कमाल सा कोमल”

उदाहरण 2

सागर सा गंभीर हृदय हो,

गिरी स ऊंचा हो जिसका मन।

उदाहरण 3

चन्दा जैसा सुंदर मुख हो।

उदाहरण 4

अंबानी जैसे आप भी आगे बढ़ें।

इसके अलावा आपकी जानकारी के लिए बता दूँ की उपमा अलंकार के भी 4 भाग होते हैं

  1. उपमेय – जब एक वस्तु या व्यक्ति की समानता किसी दूसरे वस्तु या व्यक्ति से की जा रही है तब वहाँ पर उपमेय होता है।
  2. उपमान – उपमेय की समानता जिस भी व्यक्ति या वस्तु से की जाती है उस व्यक्ति या वस्तु को उपमान कहते हैं।
  3. वाचक शब्द – जब उपमेय में उपमान की संभावना की जाए तो उसे ही वाचक शब्द कहते हैं।
  4. साधारण शब्द – किसी भी वस्तु या व्यक्ति की समानता या तुलना करने पर किसी दूसरे गुण की जरूरत पड़े तब उसे ही साधारण शब्द कहते हैं।

रूपक अलंकार किसे कहते हैं – Rupak Alankar Kise Kahate Hain

Rupak Alankar Ki Paribhasha – रूपक अलंकार में किसी भी वस्तु या व्यक्ति को किसी दूसरे वस्तु या व्यक्ति की जैसा बताया जाता है और उसे ही रूपक अलंकार कहते हैं।

मतलब उपमा अलंकार में किसी भी व्यक्ति या वस्तु की एक दूसरे की तुलना की जाती है लेकिन रूपक अलंकार में एक दूसरे के बिल्कुल समान बताया जाता है।

रूपक अलंकार के उदाहरण – Rupak Alankar Ke Udaharan

उदाहरण 1

“प्रेम रतन धन पायो”

उदाहरण 2

चरण-कमल बंदौ हरिराई।

उदाहरण 3

राम कृपा भव-निसा सिरानी।

उदाहरण 4

मैया ! मैं तो चंद्र-खिलौना लैहों।

उत्प्रेछा अलंकार किसे कहते हैं – Utpreksha Alankar Kise Kahate Hain

उत्प्रेक्षा अलंकार का मतलब जहां पर उपम्ह में उपमान की संभावना की जाए उसी को उत्प्रेक्षा अलंकार कहते हैं जैसे की मानो, जानो इत्यादि।

उत्प्रेक्षा अलंकार के उदाहरण – Utpreksha Alankar Ke Udaharan

उदाहरण 1

जानो वो शहर चला गया।

उदाहरण 2

मानो वो जा रहा है।

उदाहरण 3

जानो उसने अपनी शादी कर ली।

उदाहरण 4

मानों उसने आकाश को छू लिया हो।

द्रष्टान्त अलंकार किसे कहते हैं – Drishtant Alankar Kise Kahate Hain

जब किसी भी वाक्य के उपमेय में उपमान का भाव प्राप्त हो तो उसे द्रष्टान्त अलंकार कहते हैं।

द्रष्टान्त अलंकार के उदाहरण – Drishtant Alankar Ke Udaharan

उदाहरण 1

एक म्यान में दो तलवारें, कभी नहीं रह सकती हैं।

किसी और पर प्रेम नारियां, पति का क्या सह सकती हैं।।

उदाहरण 2

तजि आसा तन प्राण की, दीपहिं मिलत पतंग।

दरसावत सव नरन को, परम प्रेम को ढंग।।

अतिश्योक्ति अलंकार किसे कहते हैं – Atishokti Alankar Kise Kahate Hain

अतिश्योक्ति अलंकार उन वाक्यों को कहते है जहां पर किसी भी वाक्य बात को काफी बढ़ा चढ़ा कर बताया जाए उसे ही अतिश्योक्ति अलंकार कहते हैं।

अतिश्योक्ति अलंकार के उदाहरण – Atishokti Alankar Ke Udaharan

उदाहरण 1

हनुमान की पूँछ में, लग न पाई आग।

लंका सगरी जल गई, गए निशाचर भाग।।

उदाहरण 2

देख लो संकेत नगरी है यही।

स्वर्ग से मिलने गगन में जा रही।।

उपमेय अलंकार किसे कहते हैं – Upmey Alankar Kise Kahate Hain

Upmey Alankar Ki Paribhasha – जब किसी एक वस्तु या व्यक्ति की समानता किसी दूसरे व्यक्ति या वस्तु से की जाती है तो उसी व्यक्ति या वस्तु को जिससे समानता की जा रही है उसे ही उपमेय अलंकार कहते हैं।

उपमेय अलंकार के उदाहरण – Upmey Alankar Ke Udaharan

उदाहरण 1

पीपर पात सरिस मन डोला।

उदाहरण 2

नील गगन सा शांत हृदय हो।

उदाहरण 3

मुख चंद्रमा सा सुंदर हो।

प्रतीप अलंकार किसे कहते हैं – Prateep Alankar Kise Kahate Hain

इस अलंकार का मतलब उल्टा होता है मतलब किसी भी वाक्य का सीधे स्वरों में ना होना ही प्रतीप अलंकार कहलाता है।

प्रतीप अलंकार के उदाहरण – Prateep Alankar Ke Udaharan

उदाहरण 1

“नेत्र के समान कमल है”

उदाहरण 2

बिदा किए बहु बिनय करि, फिरे पाइ मनकाम।

उतरि नहाये जमुन-जल, जो शरीर सम स्याम।।

अनन्वय अलंकार किसे कहते हैं – Ananvay Alankar Kise Kahate Hain

जब कोई वाक्य में उपमेय की समानता बनाने के लिए कोई दूसरा उपमान नहीं मिलता है तो वहाँ पर उपमेय को ही उपमान बना दिया जाता है तो उसे ही अनन्वय अलंकार कहते हैं।

अनन्वय अलंकार के उदाहरण – Ananvay Alankar Ke Udaharan

उदाहरण 1

निरुपम न उपमा आन राम समानु राम, निगम कहे।

उदाहरण 2

यद्यपि अति आरत-मारत है, भारत के सम भारत है।

भ्रांतिमान अलंकार किसे कहते हैं – Bhrantiman Alankar Kise Kahate Hain

Bhrantiman Alankar Ki Paribhasha – जब किसी भी वाक्य में किसी अन्य वाक्य के होने का भ्रम पैदा हो तो उसे भ्रांतिमान अलंकार कहते हैं।

इसका मतलब और सरल मे समझें तो जैसे की कोई वस्तु है उसमें आपको ऐसा लग रहा है की कोई दूसरे वस्तु भी है जबकि दूसरी कोई वस्तु वास्तव में नहीं होती है तक उसे ही भ्रांतिमान अलंकार कहते हैं।

भ्रांतिमान अलंकार के उदाहरण – Bhrantiman Alankar Ke Udaharn

उदाहरण 1

समुझि तुम्हे घनश्याम हरि,

नाच उठे बन मोर।

दीपक अलंकार किसे कहते हैं – Deepak Alankar Kise Kahate Hain

Deepak Alankar Ki Paribhasha – जब उपमेय तथा उपमान में एक एक साधारण धर्म होता है तो उसे ही दीपक अलंकार कहते हैं।

दीपक अलंकार के उदाहरण – Deepak Alankar Ke Udaharan

1 – “भूपति सोहत दान सों, फल फूलन उद्यान”

अपहृति अलंकार किसे कहते हैं – Apanhuti Alankar Kise Kahate Hain

इस अलंकार का मतलब छिपाना होता है। जैसे की किसी भी बात को छिपाकर झूठ बोला जाए या किसी असली वस्तु को छिपाकर कर वहाँ पर कोई नकली वस्तु रख दी जाए।

अपहृति अलंकार के उदाहरण – Apanhuti Alankar Ke Udaharan

1 – नहिं पलास के पुहुप ये, हैं ये जरत अंगार।

2 – सुनहु नाथ रघुवीर कृपाला, बंधु न होय मोर यह काला।

व्यतिरेक अलंकार किसे कहते हैं – Vyatirek Alankar Kise Kahate Hain

इस अलंकार में जब किसी वाक्य पद में उपमान की अपेक्षा उपमेय को बहुत अधिक बढ़ा चढ़ा कर बोला या प्रस्तुत किया जाये तो उसे ही व्यतिरेक अलंकार कहते हैं।

व्यतिरेक अलंकार के उदाहरण – Vyatirek Alankar Ke Udaharan

1 – जिनके यश प्रताप के आगे,

ससि मलीन रवि सीतल लागे।

विभावना अलंकार किसे कहते हैं – Vibhavana Alankar Kise Kahate Hain

जब किसी वाक्य में बिना किसी कारण के ही उस कार्य का होना विभावना अलंकार कहते हैं। मतलब जैसे की कोई वाक्य है उस वाक्य में बिना किसी कारण के ही किसी कार्य का हो जाना पाया जाए तो उसे विभावना अलंकार कहते हैं।

विभावना अलंकार के उदाहरण – Vibhavana Alankar Ke Udaharn

उदाहरण 1

बिनु पद चलै सुनै बिनु काना,

कर बिनु कर्म करै विधि नाना।

उदाहरण 2

आनन रहित सकल रसभोगी,

बिनु बानी वकता बड़ जोगी।

विशेषोक्ति अलंकार किसे कहते हैं – Visheshokti Alankar Kise Kahate Hain

इस अलंकार का मतलब कारण के उपस्थित होने पर भी कार्य ना होने को ही विशेषोक्ति कहते हैं। अगर हम इसे और भी सरल भाषा में समझें की जैसे की आपके पास पानी है फिर भी आप उसे पी नहीं सकते हैं तो उसी कारण को विशेषोक्ति अलंकार कहते हैं।

विशेषोक्ति अलंकार के उदाहरण – Vishesokti Alankar Ke Udaharan

1 – नीर भरे निसि रहें तऊ न प्यास बुझाय।

अर्थान्तरन्यास अलंकार किसे कहते हैं – Arthantarnyas Alankar Kise Kahate Hain

किसी भी सामान्य कथन का समर्थन करने को ही अर्थान्तरन्यास अलंकार कहते हैं।

अर्थान्तरन्यास अलंकार के उदाहरण – Arthantarnyas Alankar Ke Udaharan

1 – जो रहीम उत्तम प्रकृति का करि सकत कुसंग,

चंदन विष व्यापत नहीं लपटे रहत भुजंग।

उल्लेख अलंकार किसे कहते हैं – Ullekh Alankar Kise Kahate Hain

जब किसी भी एक वस्तु या कथन को एक से अनेकों शब्द द्वारा उल्लेख में बताने का वर्णन किया जाए तो उसे उल्लेख अलंकार कहते हैं।

उल्लेख अलंकार के उदाहरण – Ullekh Alankar Ke Udaharan

1 – विंदु में थी तुम सिंधु अनंत एक सुर में समस्त संगीत।

विरोधाभाष अलंकार किसे कहते हैं – Virodhabhas Alankar Kise Kahate Hain

ऐसे वाक्य जहां पर किसी एक वाक्य में किसी भी प्रकार से विरोध की संभावना प्रकट हो रही हो तो उसे विरोधाभाष अलंकार कहते हैं।

विरोधाभाष अलंकार के उदाहरण – Virodhabhas Alankar Ke Udaharn

1 – जब से है आँख लगी तब से है आँख लगी।

2 – न खुदा ही मिला न बिसाले सनम।

असंगति अलंकार किसे कहते हैं – Asangati Alankar Kise Kahate Hain

जहां पर संगति का ना होना उसे असंगति अलंकार कहते हैं। इसका मतलब जहां पर किसी कार्य का कारण होता है वहीं पर वह कार्य संभव होता है।

असंगति अलंकार के उदाहरण –

1 – हृदय घाव मेरे पीर रघुवीरे।

मानवीकरण अलंकार किसे कहते हैं – Manvikaran Alankar Kise Kahate Hain

जब किसी भी निर्जीव चीजों अपने मानवीय भावनाओं द्वारा सजीव मे दर्शाया जाता है तो उसे मानवीकरण अलंकार कहते हैं।

मानवीकरण अलंकार के उदाहरण – Manvikaran Alankar Ke Udaharan

उदाहरण – 1

फूल हँसे कलियाँ मुस्काई।

उदाहरण 2

मेघ आये बड़े बन-ठन के सँवर के।

अन्योक्ति अलंकार किसे कहते हैं – Anyokti Alankar Kise Kahate Hain

जब किसी भी काव्य में उपमान के वर्णन पर उपमेय का भी वर्णन एक साथ किया जाए तो वहाँ पर अन्योक्ति अलंकार की आवृत्ती होती है।

अन्योक्ति अलंकार के उदाहरण – Anyokti Alankar Ke उदाहरण

उदाहरण

जिन दिन देखे वे कुसुम, गई सुबीत बहार।

अब अलि रही गुलाब में, अपत कंटीली डाल।।

काव्यलिंग अलंकार किसे कहते हैं – Kavyaling Alankar Kise Kahate Hain

किसी भी युक्ति के माध्यम से पूछे गए प्रश्न को ही काव्यलिंग अलंकार कहते हैं।

काव्यलिंग अलंकार के Example – Kavyaling Alanakr Ke Udaharan

1 – कनक कनक ते सौ गुनी, मादकता अधिकाय।

उही खाए बौरात नर्, इहि पाए बौराए।

स्वभावोती अलंकार किसे कहते हैं – Svabhavoti Alankar Kise Kahate Hain

किसी भी व्यक्ति, वस्तु, स्थान का सही – सही वर्णन करना ही स्वभावोती अलंकार कहलाता है।

स्वभावोती अलंकार के उदाहरण – Svabhavoti Alankar Ke Udaharan

उदाहरण

सीस मुकुट कटि काछनी, कर मुरली उर माल।

इहि बानिक मो मन बसौ, सदा बिहारीलाल।।

उभयालंकार किसे कहते हैं – Ubhaya Alankar Kise Kahate Hain

Ubhaya Alankar Ki Paribhasha – जो शब्द किसी भी शब्द या वाक्य में रहकर दोनों को चमत्कारी बनाते हैं उसे ही उभया अलंकार कहते हैं। इसका मतलब यह है की एक से अधिक अलंकारों के होने को ही उभया अलंकार कहते हैं।

उभयालंकार के उदाहरण – Ubhaya Alankar Ke Udaharn

उदाहरण 1

“कजरारी अँखियन में कजरारी न लखाय”

उदाहरण 2

पायें महावर देन को नाईन बैठी आय,

फिरी-फिरी जानि महावरी एडी भीड़त जाये।

आपकी जानकारी के लिए बता दूँ की उभयालंकार भी 2 प्रकार के होते हैं –

  1. संतुष्टि उभयलंकार –
  2. संकर उभयलंकार – जब किसी भी वाक्य में कई अलंकार ऐसे मिल जाते हैं जिनका अलग कर पाना मुश्किल होता है उसे ही संकर उभयलंकार कहते हैं। मतलब जब हम उस अलंकार को अपने वाक्य से निकाल देंगे तब हमारा वाक्य अधूरा हो जाएगा।

FAQ

सुनी सुनी में कौन स अलंकार है?

सुनी सुनी में अनुप्रास अलंकार की आवृत्ती हो रही है अर्थात यह अनुप्रास अलंकार है।

भूली सी एक छुअन में कौनसा अलंकार है?

भूली सी एक छुअन वाक्य में उपमेय में उपमान की संभावना प्रकट हो रही है अर्थात यह उपमा अलंकार का वाचक शब्द है।

उपमा के कितने अंग होते हैं?

उपमा अलंकार के 4 अंग होते हैं, उपमेय, उपमान, वाचक शब्द, साधारण वाक्य आदि।

कौने कौने में कौनसा अलंकार है?

अनुप्रास अलंकार है।

सब सखियाँ में कौन सा अलंकार है?

रूपक अलंकार है।

भवसागर में कौन सा अलंकार है?

रूपक अलंकार है।

नीलकमल में सुंदर नयन में कौन सा अलंकार है?

उपमा अलंकार है।

जल्दी जल्दी में कौन सा अलंकार है?

रुपक अलंकार है।

पीपर पात सरिस मन डोला पंक्ति में कौन सा अलंकार है?

उपमा अलंकार की आवृत्ती हो रही है अर्थात यह उपमा अलंकार है।

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