Sambhaji Maharaj Biography in Hindi – छत्रपती संभाजी महाराज जीवनी

Sambhaji Maharaj Biography in Hindi :- नमस्ते दोस्तों आप सभी का एक नए पोस्ट में एक बार फिर से स्वागत है और दोस्तों आज के इस पोस्ट में हम छत्रपती शिवाजी महाराज के बेटे छत्रपती संभाजी महाराज की कहानी तथा उनके जीवन के बारे में विस्तार से जानने वाले है। जैसा की हमे पता ही है की छत्रपती संभाजी महाराज भी देश के हित में समर्पित रहे है और संभाजी अपने बाल्य जीवन से ही राज्य की राजनीति समस्याओं का निवारण किया था।

दोस्तों ऐसे प्रश्न स्कूल परीक्षाओं में काफी ज्यादा पूछे भी जाते है इसीलिए आपको इसका ज्ञान होना काफी जरूरी है की आखिर कैसे छत्रपती संभाजी महारज जनता की हित और भलाई के लिए क्रूर प्राकृमियों से लड़े है और फतेह हासिल की है। आपको बता दूँ की दोस्तों आपको ऐसे वीर महापुरुषों के जीवन की कहानी के बारे में जानना बहुत ही जरूरी है।

क्योंकि अगर आज हम निडर होकर अपने घर में बैठे है और पूरी तरह से हम और हमारा भारत देश आजाद है तो इसमें छत्रपती संभाजी जैसे अनेक वीर जवानों का लहू इस धरती के लिए बहा है तथा अंग्रेज साम्राज्य से मुक्त हैं। वैसे इन सभी प्रश्नों के उत्तर हम विस्तार रूप से इसी आर्टिकल में जानेंगे आप इस लेख को पूरा जरूर पढ़ें तो चलिए बिना देरी किये हुए शुरू करते हैं।

Chatrapati Sambhaji Maharaj Details in Hindi (एक नजर में)

नामछत्रपती संभाजी महाराज (छवा और शंभू जी राजे)
उपनाम संभाजी महाराज
जन्म14 मई 1657
स्थान पुरंदर किला
माता का नामसईबाई
पिता का नाम छत्रपती शिवाजी महाराज
भाई छत्रपती राजाराम
बहन अम्बिकाबाई, रणुबाई जाधव, दीपा बाई, शकूबाई, कमलाबाई, राज़्कुंवाबाई शिरके
दादा शाहजी भोसले
दादी जीजाबाई
पत्नी का नाम येसूबाई
खास मित्र कौशल कवि
कौशल कला प्रेमी और वीर योद्धा
देव के पुजारी महादेव के पुजारी
शत्रु का नाम औरंगजेब
युद्ध 1689 में
मृत्यु 11 मार्च सन 1989 में
chatrapati sambhaji maharaj information in hindi

छत्रपति संभाजी महाराज का इतिहास –

महाराज जी एक सुप्रसिद्ध महाराजा छत्रपति शिवाजी महाराज के पुत्र थे संभाजी महाराज अपने पिता की भांति अपने देश और हिंदुत्व को अपना जीवन समर्पित किया और वह बचपन से ही बुद्धि और राजनीतिक विषयों पर अच्छे से निवारण किया करते थे।

छत्रपति संभाजी महाराज वीर और साहित्यक थे वह इस देश के महान हिंदुत्व राज्य स्थापित करने वाले वीर शिवाजी के पुत्र थे वह अपने पिता के भांति काफी बुद्धिमान रणनीति और कुशल बुद्धि के थे उनके अंदर बचपन से ही बहुत सारी योग्यताएं थी वह युद्ध कला और संस्कृत में काफी ज्यादा ज्यादा थे।

छत्रपति संभाजी महाराज का जन्म_ महाराज जी का जन्म 14 मई 1657 को एक किले में हुआ जिसका नाम पुरंदर का किला था महाराज जी का संस्कृत साहित्य कला और इतिहास के ज्ञाता और इनको उनका प्रेमी भी कहा जाता है।

महाराज जी का वंशज –

वीर शिवाजी महाराज के पुत्र थे इनकी माता का नाम साईं बाई था और वह वीर शिवाजी महाराज की दूसरी पत्नी के पुत्र थे और वीर शिवाजी महाराज के दूसरी पत्नी के पुत्र थे इनके परिवार माता-पिता के अलावा इनके दादा शाहजी राजे दादी जीजाबाई और भाई बहन थे शिवाजी की तीन पत्नियां थी जिनका नाम निम्न है उनकी पहली पत्नी का नाम साईं भाई दूसरी पत्नी का नाम सोयराबाई और तीसरी और अंतिम पत्नी का नाम पुतलाबाई था संभाजी महाराज के एक भाई राजाराम छत्रपति थे जो कि इनकी दूसरी माता सोयराबाई के पुत्र थे।

महाराज संभाजी का राज्याभिषेक –

11 जून 1665 को पुरंदर की संधि में शिवाजी ने या सहमति दी थी कि संभाजी यानी उनके पुत्र मुगल सेना को अपनी सेवाएं देंगे जिसके कारण मात्र 8 वर्ष की आयु में सांबा जी ने खुद बीजापुर सरकार के खिलाफ औरंगजेब का साथ दिया था और खुद को और अपने पिता को औरंगजेब के दरबार में प्रस्तुत किया संभाजी और उनके अन्य सहयोगी को सत्ता सौंप दी गई इस कारण जिसका मुख्य उद्देश्य था औरंगजेब के दरबार में सांबा जी और उनके पिता को आदेश दिया गया था कि ने नजर बंद कर दिया जाए संभाजी महाराज अपनी कुशल बुद्धि और राजनीति से किसी तरह वहां से भाग निकल आए।

छत्रपती संभाजी पर औरंगजेब का अत्याचार – Chatrapati Sambhaji Maharaj

Sambhaji Maharaj Biography in Hindi :- सन 1689 तक स्थितियाँ काफी बदल चुकी थी। पूरा मराठा राज और छत्रपती संभाजी महाराज आने वाली परिस्थितियों शत्रुओं के आगमन से अनजान थे और ऐसे में मुकर्राब खान के अचानक आगमन और मराठा राज पर अचानक आक्रमण करके संभाजी और संभाजी के प्रिये मित्र कवि कलश को बंदी बना लिया और कारागार में डाल दिया।

और यह खबर पहले ही मुगल शासक तक पहुँच चुकी थी थी और मुगल शासक इसी खुशी में पूरे मार्ग में जीते हुए विजयी सेनापतियों के लिए एक बड़े महोत्सव की घोषणा कर दी। और इस तरह से मुगल शासक संभाजी और कवि कलश को लेकर वहाँ से मुगल दरबार के लिए निकल पड़े और चलते चलते 5 दिन बीत गए और फिर 5 दिन लगातार चलने के बाद मुगल सेनापति और साथ ही बंदी बने संभाजी तथा कवि कलश भी औरंगजेब के दरबार पहुँच गए।

जैसे ही संभाजी औरंगजेब के बारबार पहुंचे औरंगजेब अपने सिंहासन से नीचे उतर आये और भारी महफ़िल में औरंगजेब ने संभाजी से कहा की मराठाओं का आतंक कुछ ज्यादा ही हो गया था और वीर शिवाजी के पुत्र संभाजी का मेरे सामने खड़े होना हमारे लिए एक बहुत ही बड़ी उपलब्धि है। और यह कहकर औरंगजेब अल्लाह को याद करके संभाजी के सामने नतमस्तक हो गए। और यह सब देख कवि कलश बिना डरे हुए कहा देखो सभी लोग आज औरंगजेब अपने दुश्मन के सामने अपने घुटने टेक दिए हैं। और इतना सुनने के बाद औरंगजेब आग बबूला हो गए और संभाजी साथ ही कवि कलश को तुरंत ही तहखाने के अंदर डाल दिया।

संभाजी महाराज की उपलब्धियां –

महाराज जी ने अपने छोटे से जीवन काल में हिंदू समाज के हित में बहुत बड़ी बड़ी उपलब्धियां हासिल की थी जो हिंदू समाज का हमेशा आभारी रहेगा महाराज जी ने औरंगजेब 8 सेना का सामना किया और कई युद्धों में मुगलों को पराजित किया वह कुछ समय ऐसा था जो कि लगातार कई समय तक पहाड़ और धरती वीर मराठा और मुगलों के खून से सनी रहती थी।

वह समय काफी कठिन था जब कई वर्षों तक अघात और प्रतिघात का क्रम चलता रहा जिसने मुगलों द्वारा गढ़ को जीतना और मराठों द्वारा वापिस हासिल करना लगातार मुश्किल था इस बीच वे सोचने लगे कि औरंगजेब दिल्ली कभी लौटकर नहीं आएगा और हिंदुत्व के साथ जंग में हार जाएगा इसीलिए संभाजी ने 1622 में औरंगजेब के पुत्र यानी अकबर जो महान शासक था उसको शरण देने का प्रस्ताव अपने महान राजपूत साथियों के साथ प्रस्तुत किया जिसमें राजपूत राजाओं ने अकबर को शरण दिया और उसे बचा लिया।

संभाजी महाराज की मृत्यु –

औरंगजेब ने कई बार कहा कि वह संभाजी को क्षमा कर देगा यह घटना उस समय की है जब औरंगजेब ने संभाजी महाराज को एक युद्ध के दौरान हराकर छल कपट के जरिए उन्हें अपने बंदी गृह में बंदी बना लिया तब उन्होंने संभाजी महाराज को बार-बार एक ही प्रस्ताव स्वीकार करने के लिए प्रेरित करते और कहते कि यदि संभाजी महाराज इस्लाम धर्म को कबूल कर लेते हैं तो वह उनको क्षमा कर देंगे इसी बीच संभाजी महाराज के साथ ही थे उनको काफी किल्लत बड़ी जिंदगी और बहुत कुछ सोचने पर और जिंदगी को एकदम तार-तार कर दिया था।

लेकिन औरंगजेब हमारे वीर संभाजी महाराज के सामने जब भी वह प्रस्ताव रखता संभाजी महाराज हमेशा यही कहते हैं कि मैं मुस्लिमों की तरह मुर्ख नहीं हूं जो कि डरकर औरंगजेब के सामने घुटने टेक दूं या मैं उसका प्रस्ताव स्वीकार कर लूं संभाजी महाराज ने औरंगजेब का प्रस्ताव स्वीकार करने से मना कर दिया और उन्होंने कहा कि मैं गर्दन काटा ना सम्मान से समर्पित है देश के लिए लेकिन मुझे घुटने टेकना नहीं वह हमेशा अपने वीर पिता शिवाजी महाराज को याद करते हैं और कहते हैं कि मैं वीर शिवाजी का पुत्र हूं तो मैं सर कटा सकता हूं लेकिन झुका नहीं सकता हूं।

संभाजी महाराज का फीस उन्होंने महादेव जी का सुमिरन किया और या फिर कहा कि धर्म और अधर्म को हे महादेव आप देखना आप देखना मैं अपना हजारों जीवन और जन्म को अपने देश और हिंदुत्व पर निछावर करता हूं संभाजी महाराज का औरंगजेब ने बड़ी ही बेरहमी से दोनों हाथ काट दिए थे उसके 4 हफ्ते बाद 11 मार्च के दिन 1689 में हमारे वीर और साहसी हिंदू हृदय सम्राट संभाजी महाराज का सर धड़ से अलग कर दिया गया।

FAQ

औरंगजेब ने संभाजी को क्यों मारा?

औरंगजेब संभाजी को इस्लाम अपने के लिए जबरन विवश कर रहे थे लेकिन संभाजी अपने धर्म पर अटल थे इसीलिए औरंगजेब ने संभाजी को मारा।

छत्रपती संभाजी महाराज के पिता कौन थे?

वीर संभाजी के पिता का नाम छत्रपती शिवाजी महाराज था।

छत्रपती शिवाजी के भाई का क्या नाम था?

छत्रपती शिवाजी महाराज के भाई का नाम शाहजी भोसले था। इस हिसाब से शाहजी भोसले छत्रपती संभाजी महाराज के चाचा थे।

छत्रपती संभाजी महाराज का जन्म कब हुआ था?

Sambhaji Maharaj Birth Date :- छत्रपती संभाजी का जन्म 14 मई 1657 में पुरंदर किला नामक स्थान पर हुआ था।

संभाजी महारज की फोटो? Sambhaji Maharaj Photo

Sambhaji Maharaj Wikipedia Image

Sambhaji Maharaj Weight and Height

Sambhaji Maharaj Height :- संभाजी का वजन 220 किलो का था तथा इनकी लम्बाई 7.1 इंच के लगभग थी।

छत्रपती संभाजी महाराज राज्याभिषेक दिन?

Sambhaji Maharaj Rajyabhishek – 11 जून 1665 को छत्रपती संभाजी महाराज का राज्याभिषेक हुआ था।

संभाजी महारज इतिहास मृत्यु Video?

संभाजी महाराज के मृत्यु के समय की ऑरोजिनल विडिओ आपको कहीं पर भी नहीं लेकिन यूट्यूब पर आपको दूसरे यूट्यूबर्स के द्वारा इसे विडिओ के माध्यम से दर्शाया और दिखया है की कैसे संभाजी तथा उनके साथी को बड़ी ही बेरहमी से मारा गया है जिसे आप यहाँ पर क्लिक करके देख सकते हैं। Click Here

छत्रपती संभाजी महाराज की पत्नी का नाम क्या था?

संभाजी महाराज की धर्मपत्नी का नाम येसुबाई था।

आखरी शब्द –

दोस्तों मुझे आशा है की आपको आज का यह पोस्ट Sambhaji Maharaj Biography in Hindi पढ़कर समझ आ गया होगा की छत्रपती संभाजी महाराज कौन थे तथा इन्होंने किन किन परिस्थितियों का सामना किया है।

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यह पोस्ट (Sambhaji Maharaj Biography in Hindi) पढ़ने के लिए धन्यवाद!

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